अघंजर महादेव मंदिर जंहा 600 वर्षो से लगातार जला हुआ धुना
आज हम आपको अपनी इस वीडियो के माधयम से हिमाचल प्रदेश के जिला काँगड़ा में स्थित एक ऐसे धार्मिक स्थान के बारे में बताने जा रहे है जो महाभारत काल से संबधित तो है ही साथ ही इस मंदिर में पिछले छह सौ वर्षो से निरंतर एक धुना जल रहा है जो इस धार्मिक स्थान को और भी ज्यादा आकर्षित और लोकप्रिय बनता है। अघंजर
महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास स्थित खनियारा गाँव में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय पर्टयक स्थान धर्मशाला से मात्र साथ किलोमीटर दुरी पर है।
अघंजर महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश
अघंजर एक संस्कृत भाषा का शब्द है, पाप का नाश करने वाले को ही अघंजर अर्थार्थ शिव कहा गया है, अघंजर" शब्द का अर्थ है "अघ" (पाप) और "अंजर" (नाश करने वाला)। इसलिए, इस मंदिर को पापों का नाश करने वाला
भी माना जाता है। है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कांगड़ा जिले में श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। जंहा महाशिवरात्रि का पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होकर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा सावन के महीने में भी मंदिर में विशेष भक्ति आयोजन किए जाते हैं।
अघंजर महादेव मंदिर के बारे में एक प्रसिद्ध कथा प्रचलित है। पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है कि महाभारत काल के दौरान, जब पांडव अपने अज्ञात वनवास के समय इस क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब अर्जुन ने भगवान शिव की तपस्या इसी स्थान पर की थी। अर्जुन ने शिवजी से दिव्य अस्त्र (पशुपत अस्त्र) प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। जिसका प्रमाण आज भी मंदिर के किनारे बह रही नदी में स्थित अर्जुन गुफा
से मिलता है। इसी स्थान पर भगवान शिव ने उन्हें गुप्तेशवर महादेव के रूप में दर्शन दिए थे और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान और एक गुप्त अस्त्र दिया था, जिसका प्रयोग उन्होंने महाभारत युद्ध में किया था, आज भी इस मंदिर में पथरो में उकेरित कलाकृति इस बात को दर्शाती है की यह मंदिर काफी ऐतिहासिक और पौराणिक है।
धौलाधार पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे इस खूबसूरत और आकर्षित मंदिर का महत्व आध्यात्मिक और पौराणिक दोनों ही दृष्टिकोण से बहुत गहरा है। यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण से परिपूर्ण है, जो शिव भक्तों और पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता है।
इस मंदिर में कई वर्षो तक पूजा अर्चना करने वाले मंदिर के पुजारी संदीप शर्मा के द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार यह मंदिर द्वापर युग का मठ है, पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की महाभारत युद्ध के समाप्त होने के बाद पांडवो ने हिमालय की तरफ प्रस्थान करते हुए उन्होंने गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन किए और इस धार्मिक अघंजर महादेव मंदिर की स्थापना की थी, पांडवो ने इस उदेश से इस मंदिर की स्थापना
की थी की क्युकी महाभारत युद्ध में पांडवो के हाथो से उनके ही कई पूर्वजो की मृत्यु हो गयी थी, इसी पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने इस मंदिर की स्थापना की ताकि अघंजर महादेव के मात्र दर्शन से ही सभी पापो का नाश हो जाए, इसी कारण इस मंदिर का नाम भी अघंजर महादेव पड़ा।
तत्पचात कुछ वर्षो के बाद इस स्थान में एक संत बाबा गंगा भारती पहुंचे उन्होंने शिव भगवान की तपस्या और उनकी पूजा अर्चना की उनकी तपस्या और पूजा अर्चना से शिव भगवान् ने खुश होकर उन्हें गुप्तेशवर और अघंजर महादेव के रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद बाबा गंगा भारती इस स्थान में घुना जलाकर बैठे।
महाराजा रंजीत सिंह ने आजाद भारत के समय लगभग 40 वर्षो तक उत्तर पश्चिम भारत की कई रियासतों में राज किया, ऐसे में उस समय काँगड़ा जिसे त्रिगत रियायत के नाम से जाना जाता था वो पंजाब में हुआ करती थी, ऐसे में एक दिन राजा रंजीत सिंह शिकार करते हुए इस स्थान में पहुंचे उस समय यह स्थान घने जंगलो से भरा होता था जिसमे कई जिव जंतु हुआ करते थे, कहा जाता है की राजा रंजीत सिंह पेट की एक बीमारी से ग्रसित थे,
जो उन्हें अक्सर पीड़ा दिया करती थी, ऐसे में शिकार के दौरान भी उन्हें पेट में पीड़ा हुई और वो उस पीड़ा से परेशान होकर अघंजर महादेव मंदिर पहुंचे, जंहा वो बाबा गंगा भारती से मिले, जिसके बाद उन्होंने अपनी समस्या
बाबा गंगा भारती को बताई, की उन्हें कई वर्षो से पेट में पीड़ा हो रही है, जिसका अभी तक कोई भी इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिसके बाद बाबा ने राजा को अपने धुनें से भिभूति और जल राजा को पिया जिसके पीने के तुरंत बाद राजा की पीड़ा बंद हो गयी, और राजा उस स्थान से चले गए।
ऐसे में कई दिनों तक तक जब राजा को पेट की पीड़ा दुबारा नहीं हुई तो वो समझ गए की ऐसा बाबा की भिभूति से ही हुआ है, बाबा के इस चमत्कार से खुश होकर राजा दुबारा इस धार्मिक स्थान में आए और गंगा भारती को एक कीमती शाल भेंट की बाबा ने उस शाल को अपने धुनें में दाल दिया, जिससे राजा क्रोधित हो गया की मेरे द्वारा दी
गयी भेंट को आपने जला दिया और मेरे द्वारा दिए गए सम्मान का अपमान किया, ऐसे में बाबा ने राजा के मन का भाव जान कर उसी धुनें में अपना चिमटा मारा और सैकड़ो शाले धुनें से बाहर आ गयी, और बाबा ने कहा की अपनी
शाल को पहचानो और उसे ले जाओ बाबा बहुत ही सरल सवाभ के थे, राजा बाबा के इस चमत्कार तो देखते ही उनके चरणों में आ गए और उनसे अपनी भूल की माफ़ी मांगी और अपनी गलती का पछताप करने के लिए उन्होंने
अघंजर महादेव मंदिर और बाबा की धुनि के लिए मंदिर को बहुत सारी भूमि मंदिर को दान थी आज भी कहा जाता है की खनियारा गांव के चालीस प्रतिशत लोग मंदिर की भूमि में रहते है, आज भी अघंजर महादेव मंदिर के नाम छह सौ करनाल भूमि है।
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 600 वर्ष पूर्व हुआ था। मंदिर के निर्माण से जुड़ी कोई प्रमाणित ऐतिहासिक जानकारी नहीं है, लेकिन यह स्थल कई पीढ़ियों से पूजा-अर्चना का केंद्र रहा है। स्थानीय मान्यता है कि यह मंदिर स्वयंभू है और यहां शिवलिंग की स्थापना स्वाभाविक रूप से हुई थी
इस ऐतिहासिक मंदिर के पीछे एक छोटा झरना भी है, जिसकी धारा मंदिर की पवित्रता को और भी बढ़ाती है। यहाँ का वातावरण शांत, ठंडी हवाओं से भरपूर और ध्यान करने के लिए उपयुक्त है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में आकर शिवलिंग के दर्शन करते हैं और झरने का पानी भी एक धार्मिक महत्व रखता है।
मंदिर के प्रवेश द्वार में भगवान शिव, गणेश और हनुमान जी की प्रीतिमा, साथ ही मंदिर के साथ ही भक्तो के प्रवास के लिए एक बड़ी सराय भी है जिसके साथ एक बड़ा मैदान है जंहा भक्त समय व्यतीत कर सकते है, इसी मैदान में बच्चो के लिए झूले भी लगाए गए है। मंदिर के प्रागण में एक पवित्र कुंड है जिसको लेकर यह मान्यता है की यदि इस कुंड में सिक्का डालने से श्रदालुओ की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस मंदिर में आपको भगवान् शिव की कई पवित्र प्रतिमाएं और शिलिंग देखने को मिलेंगे, जिनकी हर दिन पूजा अर्चना की जाती है।
साथ ही इस मंदिर में भगवान् राधा कृष्ण का मंदिर भी है, जो पर्टयकों और श्रदालुओ को अपनी ओर आकर्षित करता है, इस मंदिर की यह मान्यता है की जो भी नवविवाहित जोड़ा इस मंदिर में जो भी सच्चे मन से मांगता है उसकी वो मनोकामना कृष्ण भगवान् पूरी करते है। मंदिर के प्रागण में ही बाबा गंगा भारती जी की भी प्रतिमा बनी हुई है। मंदिर के गर्व ग्रह में 600 वर्षो से प्रज्वलित धुंआ जला हुआ है, जो मंदिर के मुख्य आकर्षण का केंद्र है।
मंदिर के किनारे बह रही मनुनि नदी की बहती जलधारा श्रदालुओ को काफी मनमोहित करती है, साथ ही नदी के किनारे स्थित अर्जुन गुफा भी स्थित है कहा जाता है की जिस मनुष्य के मन में घोट हो वो इस गुफा में नहीं घुस पाता, आज भी इस गुफा के दर्शन के लिए हजारो श्रदालु आते है। साथ ही श्रदालुओ के लिए यंहा भंडारे की व्यवस्था भी की गयी है, जंहा आप मंदिर का प्रशाद ग्रहण कर सकते है।
इस मंदिर में धर्मशाला से आसानी से पहुँचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट और हवाई अड्डा गग्गल में है। दिल्ली और अन्य शहरों से धर्मशाला तक बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं अघंजर महादेव मंदिर शिव भक्ति, पौराणिक महत्व, और प्राकृतिक सौंदर्य का एक अद्भुत संगम है। यह स्थल न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक
अनुभव के लिए भी प्रसिद्ध है। यदि आपने अभी तक इस मंदिर के दर्शन नहीं किए तो एक बार अवश्य करे साथ ही यदि आपको हमारी यह वीडियो अच्छी लगे तो वीडियो को शेयर कमेंट और चैनल को सब्सक्राइब अवश्य करे ताकि हम ऐसी ही वीडियो आपके लिए लाते रहे।
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